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Agam Rathor is back

शेखावत मेनसन,

नीर को किसी ने गिरने से बचाया था और नीर उस इंसान को थैंक्स कहने के लिए पीछे मुड़ी तो सामने खड़े शख्स को देख कर हैरान रह गई। वो अपनी जगह जेसे फ्रिज हो गई थी। वहा पर मौजूद सभी लोग भी हेरान हो गये थे। तभी शालिनी जी ने धीरे से कहा,"अगम"।

शालिनी जी ने एक बार उसकी तरफ देखा और बाद मे यशवंत कि तरफ जिनके चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था पर फिर उन्होंने खुद को नॉर्मल कर दिया।

शौर्य ने भी अगम की तरफ देखा उसके चेहरे पर भी shock साफ दिखाई दे रहा था लेकीन अपने shock से recover होते हुए उसने बड़ी सी smile की और स्टेज से नीचे आया और अगम को गले लगाते हुए कहा," what a surprise Agam!! मेने तो तेरे आने की उम्मीद ही छोड दी थी। आज इतने साल बाद फाइनली तु वापस आया है।"

फिर उसने वहां मौजूद सभी लोगों की तरफ देखते हुए जोर से कहा, " Everyone। Agam Rathor is back।"

ये सुनने के बाद सभी लोग cheer करने लगे और clapping करने लगे।

अगम ने नीर की तरफ देखते हुए कहा," मुझे तो आना ही था।" अगम की आवाज सुन नीर ने उसकी तरफ देखा और उसकी आँखे अगम की आँखों से जा टकराइ। उसकी हेजल ग्रीन आइस अगम की डार्क ब्राउन आइस से मिली और नीर ने जल्दी से अपनी आँखे दूसरी तरफ कर ली। शौर्य भी अगम से अलग हुआ। ऋषि ने वहा आते हुए कहा," अगम भाई आपने तो सब को surprise दे दिया।" कहते हुए वो अगम के गले लग गया। 

शालिनी भी उसके पास आने वाली थी ये देख कर अगम ने कहा," बाकी बाते बादमें कर लेंगे पहले सगाई की रस्मे कर लेते हैं क्यु अमर अंकल?"

अमर जी ने कहा," ये भी ठीक है वेसे भी अब तुम यही तो रहोगे तो फिर चलो सब सगाई की रस्मे शुरू करते हैं।"

अगम ने एक बार फिर नीर की तरफ देखा वो उसकी तरफ जाने लगा ये देख नीर तुरंत वहा से हट गई और शौर्य के पास जा कर खडी हो गई। तभी अगम के पास रितिका आई और उसे गले लगाते हुए कहा," I miss you so much भाई।" अगम ने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा," me too।"

इस पर रितिका ने उससे अलग होते हुए कहा," झूट मत बोलिए। आपको कोई याद वाद नहीं आई मेरी अगर आई होती तो इतने सालों में आपने मुझसे बात की होती। आपको पता है आपसे बात करने की कितनी कोशिश की मेने पर आप तो आप हो "The great Agam Rathore" आपको इतने साल मे एक बार भी याद नहीं आई ना मेरी।" उसकी आँखों में आशु आने लगे थे। अगम ने उसकी आँखों से आशु पोछते हुए कहा," एसी बात नहीं है रितु में......"

रितिका ने बीच में ही कहा," जाइए नहीं करनी अब आपसे बात।" कहते हुए वो वहा से चली गई। अगम ने एक गहरी साँस ली और वो भी स्टेज की तरफ आ गया।

कुछ देर मे सगाई की सारी रस्मे पूरी हो गई और सब लोग आपस में बाते कर रहे थे। शौर्य भी माही को अपने friends और relatives से मिलवा रहा था। नीर एक कोने में चुप चाप खडी थी। वो खुद से ही बोली," वो वापस क्यु आए है? वो यहां.... में फिर... relax नीर relax...." उसने एक गहरी साँस ली और फिर कहा, " वो चाहे कुछ भी करे पर तुझे कमजोर नहीं दिखना है और उनके सामने तो बिल्कुल भी नहीं।" उसने एक बार फिर से एक गहरी साँस ली और फिर बाकी सब के पास चली गई।

नीर ने ऋषि और रितिका को देखा और वो उनके पास चली गई । उसने अपना गला ठीक करने की ऐक्टिंग करते हुए कहा," वेसे शौर्य भाई की तो शादी हो ही रही है लगे हाथ आप के भी हाथ पीले करवा दु?"

उसकी बात सुनकर रितिका ने थोड़ा blush करते हुए कहा," क्या नीर तुम भी ना।"

नीर ने कहा," अरे इसमे क्या बुराई है? ऋषि भाई आप ही बताइए ठीक केह रही हूँ ना में।"

ऋषि ने कहा," वेसे बात तो ठीक ही....."

रितिका ने उसे बीच में ही टोकते हुए कहा," ऋषि..."

ऋषि ने कहा," अरे मेरा मतलब है उसकी शादी वालीं बात सही है पर वो बात कभी और करेंगे अभी शौर्य भाई की शादी है तो उस पर फोकस करते हैं। ठीक है।"

नीर ने मुस्कुराते हुए अपना सर हिला दिया। दूर से अगम ये सब कुछ देख रहा था। वो मन ही मन बोला, " अपने गुस्से और इगो की वज़ह से बहुत कुछ मिस कर दिया मेने। पर अब की बार एसा बिल्कुल नहीं होगा।"

कुछ वक़्त बाद सभी गेस्ट जा रहे थे और अब सिर्फ राठौर फॅमिली ही वहा पर थी। घर के बड़े शादी के बारे में डिस्कस कर रहे थे। और बाकी सब साथ मे बेठे हुए थे और बाते कर रहे थे। नीर को अपने उपर किसी की नजरे मेहसूस हुई उसने उस direction मे देखा तो अगम को उसकी तरफ देखता पाया जो एकटक उसे ही देख रहा था। उसने मन ही मन कहा, " ये इंसान अब भी नहीं बदले।" कहते हुए उसने अपना सर हिला दिया। उसने फिर सबसे कहा," में सबके लिए कुछ खाने के लिए ले कर आती हुँ ।" कहते हुए वो किचन की तरफ चली गई और वहा पर स्टाफ को instructions देने के बाद वो वापस होल की तरफ आ रही थी तभी किसीने उसका हाथ पकडा और एक कोने में उसे खींच लिया।

इस सडन हरकत से वो समझ नहीं पाई की क्या हुआ उसने देखा कि उसके सामने अगम खड़ा था। ये देख उसने अपना हाथ उसकी पकड से छुड़ाते हुए कहा," हाथ छोड़िए मेरा।" 

अगम ने कहा," और मे अगर ना छोड़ना चाहूं तो?"

नीर ने थोड़ा जोर देकर अपना हाथ छुड़ा लिया और कहा," अपना हाथ छुड़ाना अच्छे से आता है मुझे।" कहते हुए वो वहा से जाने लगी। अगम ने फिर से उसका हाथ पकड कर उसे अपनी तरफ घुमाया। नीर ने इस बार थोड़ा गुस्से में उसकी तरफ देखा।

अगम ने कहा," तुम्हारी एसी गुस्से वालीं आँखों से मुझे कोई फर्क़ नहीं पड़ता जानती हो ना तुम।"

इस पर नीर ने कहा," आपको वेसे भी कौनसी बात से फर्क़ पड़ता है ?" ये सुनते ही अगम की पकड़ थोड़ी ढीली हो गई और नीर ने अपना हाथ छुड़ाया और वहा से चली गई। जाते हुए उसने आशु पोछ लिए जो उसकी आँखों से बहने ही वाले थे ।

वहीं अगम ने उसे जाते हुए देख कर कहा," जानता हू बहुत तकलीफ दी है मेने तुम्हें पर trust me इस बार में सब ठीक कर दूँगा।" कहते हुए वो भी होल की तरफ चला गया।

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yanshii

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